राघव धीरे चलो, ससुराल गलियाँ ।

राघव धीरे चलो, ससुराल  गलियाँ ।
मिथिला की नारि नवेली, मोहित छवि लखि रंगरलियाँ ।  राघव...
पीत उपरना कानन कुंडल, लटकत माथे मौर लारियाँ । राघव....
तुमहि बिलोकि न नजरा लगावें, जनक नगर की सब आलियाँ । राघव...
मुनि तिय ज्यों पद, परसि तिहारो, हीरा मोति मनि होइहैं लारियाँ । राघव ...
गिरिधर प्रभु लखि, प्रेम बिबस भई, रबिहि निरखि ज्यों कमल कलियाँ ।
राघव बचिके चलो ससुराल की गलियाँ । राघव धीरे चलो.....

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